यह कहानी आपको न केवल पलिताना की पवित्रता से परिचित कराएगी, बल्कि आपको चैत्यवंदन के पीछे के भाव और विधि को भी समझने में मदद करेगी।
चैत्यवंदन की सामान्य विधि प्रणाम: palitana 5 chaityavandan in hindi full
| क्रम | चैत्य (मंदिर) | तीर्थंकर | वंदन समय | फल | | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | | 1 | मूलनायक मंदिर | ऋषभदेव (आदिनाथ) | सुबह 6-8 बजे | अक्षय पुण्य | | 2 | कुमारपाल मंदिर | शांतिनाथ | मध्य सुबह | शांति | | 3 | समवशरण | पार्श्वनाथ | दोपहर में | धर्म श्रवण | | 4 | आशापूर्णा | सिद्धिदात्री | दोपहर बाद | इच्छा पूर्ति | | 5 | गौतम स्वामी | पार्श्वनाथ | शाम | मोक्ष मार्ग | दीठे दुर्गति वारे
पर्वत के ऊपर मुख्य परिसर में प्रवेश करते समय शांतिनाथ भगवान के मंदिर में यह चैत्यवंदन किया जाता है。 स्थान: भाव भरीने जे चढे
नीचे इन पाँच चैत्यवंदनों का संपूर्ण विवरण और उनकी स्तुति की प्रारंभिक पंक्तियाँ दी गई हैं:
"श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे; भाव भरीने जे चढे, तेने भवपार उतारे।"